क्या जमीन की रजेस्ट्री रद्द करायी जा सकती है

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क्या जमीन की रजेस्ट्री रद्द करायी जा सकती है हा जमीन की विक्रय विलेख को रद्द कराया जा सकता है अगर वह छल कपट से धोखे से आदि के जरिये रजिस्ट्री करायी गयी हो।

रजेस्ट्री यानि विक्रय विलेख को रद्द करने के लिए मुख्या कुछ बातों को लेकर विक्रय विलेख को रद्द करवाया जा सकता है विलेख धोखे से पंजीकृति कराया गया हो तो उसे रजिस्ट्रार ऑफिस के समक्ष रद्द कराया जा सकता है ।

जब कोई विक्रय विलेख रजिस्टर यानी पंजीकृति हो जाता है तो उसे एक तरफ़ा रद्द नहीं किया जा सकता । इस विवाद को सिविल कोर्ट के समक्ष वाद के जरिये रद्द कराया जा सकता है।

कहने का मतलब यह है कि जब कोई रजिस्ट्री विवाद खड़ा करे तो उसे एक तरफ़ा नहीं समाप्त किया जा सकता, दोनों पक्षो की दलीलों को सुन कर ही रद्द किया जा सकता है।

जमीन बेचने के बाद क्या वापस लिया जा सकता है

संपत्ति हस्तांतरण अधिनियम, 1882 (Transfer of Property) की धारा 54 के तहत “बिक्री” स्वामित्व का हस्तांतरण है जो भुगतान की गई या वादा की गई कीमत के बदले या आंशिक रूप से भुगतान और आंशिक रूप से वादा की गई कीमत के बदले होता है।

जमीन बेचने के बाद उस बेचे हुए जमीन से रजिस्ट्री होने के बाद मालिकाना हक उसी समय समाप्त हो जाता है जब वह उस जमीन को रजिस्ट्री कर देता है।

जमीन बेचने के बाद उसे वापस नहीं लिया जा सकता अगर वह पंजीकृति हो गयी हो क्यों की उससे मालिकाना हक उसी समय समाप्त हो जाता है जब वह रेजिस्टर हो जाती है द्वतीय पक्ष यानि देने वाले का।

एक तरीके से वापस लिया जा सकता है सिविल कोर्ट में वाद प्रस्तुत कर धारा 31 Specific relief act के तहत । या धारा 17 जो की धारा 27 और 34 विशिष्ट रहत अधिनियम कहता है रजिस्ट्री दफ्तर के ऑथोरिटय मतलब अधिकारी के पास से उसे रद्द करने जा सकता है ।

जमीन की रजिस्ट्री निरस्तीकरण का आदेश कब दिया जा सकता है? धारा 31 विशिष्ट राहत अधिनियम, 1963

(1) कोई भी व्यक्ति जिसके विरुद्ध कोई लिखित दस्तावेज शून्य या निरस्तीकरणीय है, और जिसे यह उचित आशंका है कि यदि ऐसा दस्तावेज लंबित रहा तो उसे गंभीर क्षति हो सकती है ।

तो वह इसे शून्य या निरस्तीकरणीय घोषित कराने के लिए मुकदमा कर सकता है। और न्यायालय अपने विवेक से इसे शून्य या निरस्तीकरणीय घोषित कर सकता है और इसे सौंपने और निरस्त करने का आदेश दे सकता है।

(2) यदि दस्तावेज भारतीय पंजीकरण अधिनियम, 1908 (16 ऑफ 1908) के तहत पंजीकृत किया गया है, तो न्यायालय अपने निर्णय की एक प्रति उस अधिकारी को भी भेजेगा जिसके कार्यालय में दस्तावेज पंजीकृत किया गया है।

और ऐसा अधिकारी अपनी पुस्तकों में मौजूद दस्तावेज की प्रति पर उसके निरस्तीकरण का तथ्य अंकित करेगा।

विक्रय विलेख यानि रजिस्ट्री क्या है, क्या जमीन की रजेस्ट्री रद्द करायी जा सकती है

विक्रय विलेख एक निजी दस्तावेज है जिसे रजिस्ट्री ऑफिस द्वारा रजिस्ट्री एक्ट के तहत किया जाता है किसी भी अचल संपत्ति की। विक्रय विलेख एक निजी दस्तवेज होने बावजूद राज्य द्वारा एक प्रतिलिपी रखता है।

जिसमे संपत्ति का पूरा विवरण दसा तथा मुख्य बाते लिखी होती है जैसे नीचे बताया गया है :-

  • संपत्ति का पूरा विवरण
  • किस प्रकार की संपत्ति है संक्रमणी या असंक्रमणि
  • संपत्ति का पूरा भू भाग मतलब क्षेत्र फल
  • कितना मालियत संपत्ति का है
  • कितना कर राज्य सरकार द्वारा लगाया गया है
  • संपत्ति का चौहद्दी मतलब जमीन के आसपास क्या है जिसमे पूरी दिशा के साथ दरसाया जाता है ।
  • दोनों पक्षो के फोटो, हस्ताक्षर तथा सरकार द्वारा जारी कोई प्रमाण पत्र।
  • दो गवाह दोनों के फोटो तथा हस्ताक्षर ।

धारा 34 विशिष्ट राहत अधिनियम, अधिकार की घोषणा

धारा 34 विशिष्ट राहत अधिनियम न्यायलय के विवेकाधिकार के आधार पर स्थिति या अधिकार की घोषणा करना कहता है ।

यह धारा 34 कहता है कि कोई व्यक्ति किसी संपत्ति का कानूनी हाकदार है और कोई उसके हक को नकारता यानि रोकता है, या रोकने में रूचि रखता है तो वह व्यक्ति न्यायालय के समक्ष वाद प्रतुत कर किस प्रकार वह हाकदार है बता सकता है। और न्यायालय अपने विवेक से उसमें यह घोषणा कर सकता है कि वह इस प्रकार हकदार है।

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