ग्राम सभा सरकारी भूमि का पट्टा आबादी के लिए कैसे होता है उत्त्तर प्रदेश

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29 नवंबर 2012 से पूर्व माकन बना हुवा है, और अभी तक भूमि जो की सरकारी अभिलेख में सरकारी खाते की भूमि है, जैसे नाविन परती, आदि तो उसे आबादी में परवर्ती कराया जा सकता है किन्तु भूमि किसी योजना के लिए प्रस्तावित, या किसी मुख्य उद्देश्य के लिए रिज़र्व नहीं किया गया हो तब। सरकारी भूमि का पट्टा

  • ग्राम सभा के ही व्यक्ति को आवंटित किया जा सकता है।
  • ग्राम सभा की तरफ से प्रस्ताव पारित जो की भूमि प्रबंधक समिति द्वारा किया जाता है। जिसमे
    • ग्राम प्रधान, सदस्य, लेखपाल, होते है।
  • तहसील में वाद दायर करना होता है,
  • उपजिलाधिकारी द्वारा आपत्ति को सुना जाता है उसके बाद निपटारा किया जाता है।

धारा 67क उत्तर प्रदेश राजस्व संहिता 2006 कुछ आवासीय भूखंडों का निपटारा उनके वर्तमान मालिकों के साथ किया जाना बताता है ।

धारा 67क यूपी राजस्व आवासी हेतु भूमि परिवर्तन, सरकारी भूमि का पट्टा

67क यह प्रावधान करता है कि यदि धारा 64 की उप धारा(1) में उल्लिखित किसी व्यक्ति ने इस संहिता की धारा 63 में उल्लिखित किसी भूमि पर, जो किसी सार्वजनिक प्रयोजन के लिए आरक्षित नहीं हो।

कोई गृह (घर) निर्माण किया हो और ऐसा गृह 29 नवम्बर 2012 को विद्दयमान(मौजूद) हो तो ऐसे गृह का स्थल गृह के स्वामी द्वारा ऐसे प्रतिबंधों और शर्तों पर, जो कानून द्वारा तय किया गया हो, वह स्थान घर के मालिक के पास रहेगा।

ग्राम सभा में रहने वाले और अनसूचित जाती या अनुसूचित जनजाति या अन्य पिछड़े वर्गों या सरकार द्वारा गरीबी रेखा के नीचे रहने वाले के रूप में निर्धारित सामान्य वर्ग के व्यक्तियो से सम्बंधित कोई कृषि श्रमिक या कोई ग्रामीण कारीगर (जो सरकारी पट्टेदार नहीं हो) ।

सरकारी भूमि पर गृह निर्माण किया हो, और ऐसा गृह 29 नवम्बर 2000 को मौजूद हो, तो ऐसे गृह के स्थल गृह के स्वामी के साथ किया गया समझा जायेगा।

उत्तर प्रदेश राजस्व की धारा 63 भूमि जो आबादी के लिए आवंटित किया जा सकता है, सरकारी भूमि का पट्टा

धारा 63 की उपधारा 1 प्रावधान करता है कि उप जिलाधिकारी अपनी पहल पर (स्वप्रेरणा से) या भूमि प्रबंधक समिति के संकल्प के आधार पर धारा 64 में विनिर्दिष्ट व्यक्तियो को आवंटन के लिए आबादी स्थलों की व्यवस्था हेतु निम्नलिखित श्रेणी की भूमि चिन्हित कर सकता है।

  • धारा 59(2)(1) उस भूमि को छोड़कर जो उस समय किसी जोत या बाग का हिस्सा है—चाहे उस पर खेती की जा सकती हो या नहीं। किसी ग्राम पंचायत को सौंपी गयी या सौपी हुई समझी गयी समस्त भूमि।
  • इस संहिता के किसी अन्य उपबंध के अधीन ग्राम पंचायत के कब्जे में आने वाली समस्त भूमि।

भूमि प्रबंधक समिति, उप जिलाधिकारी के पूर्व अनुमोदन(approval) से निम्नलिखित श्रेणी की भूमि को भवन निर्माण के प्रयोजनों के लिए आवंटित कर सकता है।

  • धारा 59(2)(1) में कोई रिक्त भूमि
  • उत्तर प्रदेश जोत चकबंदी अधिनियम 1953 के अधीन आबादी स्थलों में लिए चिन्हित कोई भूमि,
  • भूमि अर्जन अधिनियम, 1894, और भूमि अर्जन, पुनर्वासन और पुनर्व्यवस्थापन में उचित प्रतिकर और पारदर्शिता का अधिकार अधिनियम, 2013 के उपबंधों के अधीन आबादी के लिए अर्जित कोई भूमि।

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